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2026-10-21 03:14:23 pm | Source: आईएएनएस
परमाणु कार्यक्रम एआई-आधारित भविष्य को ऊर्जा करेगा प्रदान: डॉ. जितेंद्र सिंह
परमाणु कार्यक्रम एआई-आधारित भविष्य को ऊर्जा करेगा प्रदान: डॉ. जितेंद्र सिंह

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को कहा कि भारत का परमाणु कार्यक्रम युद्ध के लिए नहीं बल्कि शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और यह एआई-आधारित भविष्य को ऊर्जा प्रदान करेगा।  

केंद्रीय मंत्री ने ने 'ब्लूमबर्ग इकोनॉमी फोरम 2026' के दौरान एक विशेष बातचीत में कहा कि भारत की भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में परमाणु ऊर्जा की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाएगी। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डेटा सेंटरों के लिए जरूरी भरोसेमंद उर्जा की बढ़ती मांग को पूरा करना भी शामिल है।

भारत के परमाणु कार्यक्रम के जनक डॉ. होमी भाभा के दृष्टिकोण को याद करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत ने हमेशा शांतिपूर्ण कार्यों एवं राष्ट्रीय विकास के लिए परमाणु ऊर्जा का उपयोग किया है। उन्होंने कहा कि परमाणु तकनीक के शांतिपूर्ण उपयोग के प्रति प्रतिबद्धता देश की कार्यनीति के केंद्र में है जबकि देश अपनी उभरती विकासात्मक एवं तकनीकी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अपनी क्षमताओं का विस्तार कर रहा है।

सिंह ने कहा कि एआई और डेटा सेंटरों के विस्तार के लिए उर्जा के ऐसे भरोसेमंद स्रोतों की आवश्यकता होगी जो उनकी बढ़ती एवं निरंतर ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा कर सकें। उन्होंने कहा कि परमाणु ऊर्जा भारत के अन्य ऊर्जा कार्यक्रमों की पूरक बनेगी और तकनीकी पर तेजी से निर्भर होती अर्थव्यवस्था की उर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में योगदान देगी।

केंद्रीय मंत्री ने एआई की बढ़ती भूमिका पर कहा कि एआई को केवल एक अलग क्षेत्र के रूप में नहीं बल्कि एक ऐसे उपकरण के रूप में देखा जाना चाहिए जिसका उपयोग सभी क्षेत्रों में किया जा सके। अंतरिक्ष एवं जीवन विज्ञान से लेकर वैज्ञानिक एवं तकनीकी विकास के अन्य क्षेत्रों तक, एआई एक अत्यंत आवश्यक उपकरण बनता जा रहा है। इसके उपयोग में मानवीय समझ के महत्व पर बल देते हुए सिंह ने कहा कि एआई का उपयोग करने के लिए व्यक्ति का खुद भी समझदार होना जरूरी है।

इसके अलावा, केंद्रीय मंत्री ने मोदी सरकार द्वारा महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील क्षेत्रों को गैर-सरकारी कंपनियों के लिए और अधिक खोलने का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस दृष्टिकोण से उन क्षेत्रों में निजी क्षेत्र की भागीदारी का दायरा बढ़ा है जो पहले बहुत सीमित थे। इससे उद्योगों को तकनीकी प्रगति, नवाचार एवं राष्ट्रीय विकास में योगदान देने के अवसर प्राप्त हुए हैं।

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