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2026-03-26 11:55:48 am | Source: IANS
भारत में कमर्शियल ड्रोन बाजार में तेजी, 2029 तक 18 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान
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भारत में कमर्शियल ड्रोन बाजार में तेजी, 2029 तक 18 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान

भारत में कमर्शियल ड्रोन इंडस्ट्री तेजी से आगे बढ़ रही है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 में इस सेक्टर का बाजार आकार 1.88 अरब डॉलर (करीब 17,000 करोड़ रुपए) तक पहुंच चुका है। अब अनुमान है कि वित्त वर्ष 2025 से वित्त वर्ष 2029 के बीच यह बाजार करीब 17.98 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ेगा। 

रिसर्च फर्म बीटूके एनालिटिक्स की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर कमर्शियल ड्रोन इंडस्ट्री में अमेरिका पहले स्थान पर है, उसके बाद चीन का नंबर आता है जबकि भारत फिलहाल सातवें स्थान पर है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि ड्रोन तकनीक खेती में लागत कम करने का बड़ा जरिया बन रही है। खासकर एग्रोकेमिकल छिड़काव में ड्रोन के इस्तेमाल से लागत लगभग 80 प्रतिशत तक कम हो सकती है। 

एक अध्ययन में 6.4 से 7.1 लाख रुपए कीमत वाले छोटे और मध्यम ड्रोन का विश्लेषण किया गया, जिनकी अधिकतम कार्य अवधि तीन साल मानी गई।

इसकी तुलना में, मैनुअल मजदूरी पर सालाना करीब 1.7 लाख रुपए खर्च होते हैं। हालांकि ड्रोन की शुरुआती लागत ज्यादा होती है, लेकिन उनकी कार्यक्षमता कहीं अधिक है। 

ड्रोन उतने समय में 6 से 6.6 एकड़ जमीन पर काम कर सकते हैं, जितना समय मजदूर एक एकड़ में लगाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, दक्षता और लागत को मिलाकर देखें तो ड्रोन मैनुअल श्रम के मुकाबले 78 प्रतिशत से ज्यादा किफायती साबित होते हैं।

भारत में इस समय 122 ड्रोन मॉडल्स को टाइप सर्टिफिकेट मिला हुआ है, जो कि डीजीसीए (नागर विमानन महानिदेशालय) द्वारा जारी किया जाता है। यह प्रमाणन इस बात की पुष्टि करता है कि ड्रोन सुरक्षा, उड़ान क्षमता और प्रदर्शन के मानकों पर खरे उतरते हैं।

इनमें से करीब 70 प्रतिशत ड्रोन कृषि कार्यों, खासकर छिड़काव के लिए उपयोग हो रहे हैं। वहीं, 24 प्रतिशत ड्रोन सर्विलांस और मैपिंग जैसे कामों में इस्तेमाल किए जा रहे हैं। इससे साफ है कि फिलहाल भारत में ड्रोन का सबसे बड़ा उपयोग खेती में हो रहा है।

सरकार की नीतियों ने भी इस सेक्टर को बढ़ावा दिया है। पूरी तरह तैयार ड्रोन के आयात पर रोक और उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना ने स्थानीय निर्माण और रिसर्च को मजबूती दी है। 

'नमो ड्रोन दीदी' योजना के तहत महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन तकनीक से जोड़ा जा रहा है, जिससे कृषि सेवाओं में उनकी भागीदारी बढ़े।

कृषि मंत्रालय ड्रोन खरीद पर सब्सिडी दे रहा है जबकि खनन और सड़क परिवहन मंत्रालय ड्रोन का इस्तेमाल निगरानी के लिए कर रहे हैं। रक्षा मंत्रालय भी ड्रोन खरीद के जरिए अपनी क्षमता बढ़ा रहा है।

सबसे खास बात यह है कि भारत का करीब 90 प्रतिशत क्षेत्र 'ग्रीन जोन' में आता है, जहां ड्रोन उड़ाने के लिए पहले से अनुमति लेने की जरूरत नहीं होती।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पंजाब, हरियाणा और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों के बाद अब अन्य राज्यों में भी खेती में ड्रोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ेगा, जिससे इस क्षेत्र में बड़ा बाजार तैयार होने की संभावना है।

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