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2026-08-15 11:19:54 am | Source: आईएएनएस
दक्षिण एशिया में बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने के लिए भारत को क्षेत्रीय केंद्र बनाए ऑस्ट्रेलिया
दक्षिण एशिया में बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने के लिए भारत को क्षेत्रीय केंद्र बनाए ऑस्ट्रेलिया

ऑस्ट्रेलिया को दक्षिण एशिया में व्यापार, ऊर्जा और बुनियादी ढांचे के एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए अपनी क्षेत्रीय रणनीति के केंद्र में भारत को रखना चाहिए। ऑस्ट्रेलिया के नीति शोध संस्थान लोवी इंस्टीट्यूट की एक नई रिपोर्ट में यह सुझाव दिया गया है।

 

रिपोर्ट में कहा गया है कि कैनबरा को भारत के साथ व्यापक रणनीतिक साझेदारी के दूसरे चरण की शुरुआत करनी चाहिए, जो द्विपक्षीय अक्षय ऊर्जा साझेदारी को और मजबूत कर सके।

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत द्विपक्षीय व्यापार, रक्षा संबंधों और अक्षय ऊर्जा सहयोग में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है।

रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित नए कार्यक्रम में भारत को दक्षिण एशिया क्षेत्रीय बुनियादी ढांचा कनेक्टिविटी (सारिक) की क्षेत्रीय रणनीति के केंद्र में रखा जाना चाहिए। इससे सौर ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला, हाइड्रोजन, ऊर्जा भंडारण, निवेश और कार्यबल के कौशल विकास के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा दिया जा सकेगा।

रिपोर्ट में कहा गया, "नवीनीकृत सारिक में भारत-केंद्रित परियोजना तैयारी विंडो बनाई जानी चाहिए। इसमें शामिल सरकारें सीमा-पार परियोजनाओं का प्रस्ताव दे सकती हैं, जिसकी शुरुआत बांग्लादेश-भूटान-भारत-नेपाल उपक्षेत्र से की जा सकती है।"

लोवी इंस्टीट्यूट ने भारत को दक्षिण एशिया की आर्थिक शक्ति और भौगोलिक केंद्र बताते हुए ऑस्ट्रेलिया से नई दिल्ली को केवल द्विपक्षीय साझेदार के तौर पर नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया के क्षेत्रीय भविष्य के केंद्रीय केंद्र के रूप में देखने का आग्रह किया।

रिपोर्ट में कहा गया कि भारत अपने बिजली ग्रिड और परिवहन प्रणालियों के जरिए तकनीकी समन्वय का नेतृत्व कर सकता है, जबकि ऑस्ट्रेलिया व्यवहार्यता अध्ययन, नियामकीय ढांचे, खरीद प्रक्रिया और पर्यावरणीय एवं सामाजिक सुरक्षा उपायों के लिए वित्तीय सहायता दे सकता है।

परियोजनाओं की तैयारी पूरी होने के बाद विश्व बैंक, इंटरनेशनल फाइनेंस कॉरपोरेशन (आईएफसी) और अन्य विकास बैंक इनके लिए वित्त उपलब्ध करा सकते हैं।

ऑस्ट्रेलिया द्वारा वित्त पोषित और विश्व बैंक तथा आईएफसी के साथ संचालित सारिक 2019 से 2024 तक 3.2 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का कार्यक्रम था। यह बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल और श्रीलंका में संचालित हुआ। कार्यक्रम के तहत सरकारों को ऐसे परिवहन और ऊर्जा परियोजनाएं तैयार करने में मदद दी गई, जिनमें सार्वजनिक या निजी निवेश आकर्षित किया जा सके। इसके अलावा परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए पेशेवर प्रशिक्षण भी दिया गया।

रिपोर्ट में बिजली व्यापार को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। इसके तहत सारिक ऐसे बिजली ग्रिड नियम विकसित करने में मदद कर सकता है, जो विभिन्न देशों की प्रणालियों के बीच तालमेल सुनिश्चित करें। इसके अलावा व्यवहार्य बिजली खरीद समझौते, साझा ऊर्जा भंडारण और बिजली संतुलन व्यवस्था विकसित करने में भी सहयोग किया जा सकता है।

बाद में यह पहल बंगाल की खाड़ी के आसपास स्वच्छ ऊर्जा उपकरणों के लिए परिवहन गलियारों के विकास में भी मदद कर सकती है।

रिपोर्ट में कहा गया, "ऑस्ट्रेलिया को किसी नए बड़े बुनियादी ढांचा कोष की जरूरत नहीं है, जब तक उसके पास विश्वसनीय परियोजनाओं की श्रृंखला तैयार नहीं होती। उसे एक आजमाए हुए तंत्र को फिर से शुरू करने की जरूरत है। भारत पैमाना, भौगोलिक स्थिति और नेतृत्व दे सकता है, जबकि सारिक संस्थागत तंत्र उपलब्ध करा सकता है।"

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