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2026-01-05 04:43:39 pm | Source: IANS
केंद्र सरकार चालू रबी सीजन में उर्वरकों की सब्सिडी पर खर्च करेगी 37,952 करोड़ रुपए
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केंद्र सरकार चालू रबी सीजन में उर्वरकों की सब्सिडी पर खर्च करेगी 37,952 करोड़ रुपए

केंद्र सरकार ने सोमवार को कहा कि रबी सीजन 2025-26 में उर्वरकों की सब्सिडी पर 37,952 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है, जो कि खरीफ 2025 सीजन से 736 करोड़ रुपए अधिक है। यह जानकारी सोमवार को सरकार की ओर से जारी किए गए एक आधिकारिक बयान में दी गई। 

सरकार ने रबी सीजन 2025-26 के लिए पोषक तत्व-आधारित सब्सिडी (एनबीएस) दरों को मंजूरी दे दी है, जो 1 अक्टूबर, 2025 से 31 मार्च, 2026 तक प्रभावी रहेंगी और इसमें फॉस्फेटिक और पोटैशिक (पी और के) उर्वरक शामिल हैं, जिनमें डीएपी और एनपीकेएस ग्रेड भी शामिल हैं।

केंद्र सरकार की कृषि क्षेत्र के लिए पोषक तत्व-आधारित सब्सिडी योजना के परिणामस्वरूप घरेलू उर्वरक उत्पादन में 50 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि हुई है, जो 2014 में 112.19 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) से बढ़कर 2025 में 168.55 लाख मीट्रिक टन हो गया है।

2022-23 और 2024-25 के बीच राष्ट्रीय उर्वरक प्रणाली (एनबीएस) सब्सिडी के लिए 2.04 लाख करोड़ रुपए से अधिक का आवंटन किया गया है, जिससे किसानों को किफायती दरों पर उर्वरक उपलब्ध हो सके हैं।

बयान में कहा गया कि एनबीएस योजना भारत की उर्वरक नीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनकर उभरी है, जो संतुलित उर्वरक प्रयोग, मृदा स्वास्थ्य और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देती है। एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली (आईएफएमएस) के माध्यम से निगरानी के डिजिटलीकरण और राज्यों के साथ नियमित समन्वय ने सभी क्षेत्रों में पारदर्शिता, जवाबदेही और समय पर आपूर्ति को बढ़ाया है।

बयान में कहा गया है कि एनबीएस योजना ने न केवल घरेलू उर्वरक उत्पादन में वृद्धि की है, बल्कि खाद्यान्न उत्पादकता बढ़ाने, मिट्टी में पोषक तत्वों का संतुलन सुधारने और उर्वरक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मजबूत करने में भी योगदान दिया है।

भारत सरकार ने 1 अप्रैल, 2010 से एनबीएस योजना शुरू की थी। यह योजना उर्वरक क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव थी, जिसका उद्देश्य किसानों को रियायती, किफायती और उचित कीमतों पर उर्वरक उपलब्ध कराना और साथ ही उनके संतुलित और कुशल उपयोग को प्रोत्साहित करना था।

एनबीएस (नेशनल न्यूट्रिएंट्स सिस्टम) ढांचे के तहत, उर्वरकों में मौजूद पोषक तत्वों, मुख्य रूप से एनपीकेएस (नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटेशियम और सल्फर) की मात्रा के आधार पर सब्सिडी निर्धारित की जाती है। यह दृष्टिकोण न केवल संतुलित पोषक तत्व प्रयोग को प्रोत्साहित करता है, बल्कि किसानों को उनकी मिट्टी और फसलों की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप सोच-समझकर निर्णय लेने में भी सक्षम बनाता है।

द्वितीयक और सूक्ष्म पोषक तत्वों के उपयोग को बढ़ावा देकर, यह योजना वर्षों से उर्वरकों के असंतुलित उपयोग से उत्पन्न मिट्टी के क्षरण और पोषक तत्वों के असंतुलन की समस्याओं का भी समाधान करती है।

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