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2026-01-18 03:51:26 pm | Source: आईएएनएस
घाटे से बाहर आईं विद्युत वितरण कंपनियां, वित्त वर्ष 25 में 2,700 करोड़ रुपए से अधिक का मुनाफा दर्ज किया
घाटे से बाहर आईं विद्युत वितरण कंपनियां, वित्त वर्ष 25 में 2,700 करोड़ रुपए से अधिक का मुनाफा दर्ज किया

 देश की विद्युत वितरण कंपनियां कई वर्षों के घाटे के बाद फिर से मुनाफे में आ गई हैं और वित्त वर्ष 2024-25 में इन कंपनियों ने सामूहिक रूप से 2,701 करोड़ रुपए का मुनाफा दर्ज किया है। यह जानकारी विद्युत मंत्रालय की ओर से रविवार को दी गई।  

विद्युत मंत्रालय की ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया कि यह इस क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। राज्य विद्युत बोर्डों के विभाजन और निगमीकरण के बाद से पिछले कई वर्षों से वितरण कंपनियां समग्र रूप से घाटे में चल रही थी।

बयान में आगे कहा गया, "वित्त वर्ष 2024-25 में कर के बाद मुनाफा (पीएटी) 2,701 करोड़ रुपए रहा है जबकि वित्त वर्ष 2023-24 में 25,553 करोड़ रुपए का घाटा और वित्त वर्ष 2013-14 में 67,962 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था।

इस उपलब्धि पर केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि यह वितरण क्षेत्र के लिए एक नया अध्याय है और वितरण क्षेत्र की चिंताओं को दूर करने के लिए किए गए कई प्रयासों का परिणाम है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा, "यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और दूरदर्शिता के कारण संभव हुई है। भारत न केवल अपनी बल्कि विश्व की भी विकास यात्रा को गति दे रहा है, जिसमें ऊर्जा क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।"

केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा, "सरकार इस क्षेत्र में आवश्यक सुधारों के लिए प्रतिबद्ध है ताकि विद्युत क्षेत्र हमारी बढ़ती अर्थव्यवस्था को सहयोग दे सके और विकसित भारत की दिशा में अपना योगदान दे सके।"

सरकार के मुताबिक,विद्युत मंत्रालय ने पिछले एक दशक में देश भर में वितरण इकाइयों के प्रदर्शन में सुधार लाने के लिए ठोस प्रयास किए हैं। विभिन्न नीतिगत पहलों के अलावा, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ व्यापक संवादों में वितरण क्षेत्र में सुधारों पर जोर दिया गया है। इनमें 2025 में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के ऊर्जा मंत्रियों के क्षेत्रीय सम्मेलनों - गंगटोक (पूर्वोत्तर क्षेत्र), मुंबई (पश्चिमी क्षेत्र), बेंगलुरु (दक्षिणी क्षेत्र), चंडीगढ़ (उत्तरी क्षेत्र) और पटना (पूर्वी क्षेत्र) के दौरान केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल के नेतृत्व में हुई चर्चाएं शामिल हैं। नियमित संवाद और समीक्षा ने वितरण इकाइयों के इस उल्लेखनीय सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

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