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2025-03-25 02:45:23 pm | Source: आईएएनएस
अगले वित्त वर्ष में एआरसी को स्ट्रेस्ड रिटेल एसेट्स में मिलेंगे बेहतर रिकवरी रेट्स
News By Tags | #RBI #Economy #ARCs
अगले वित्त वर्ष में एआरसी को स्ट्रेस्ड रिटेल एसेट्स में मिलेंगे बेहतर रिकवरी रेट्स

एसेट्स रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों (एआरसी) को अगले वित्त वर्ष में स्ट्रेस्ड रिटेल एसेट्स के लिए जारी किए गए सिक्योरिटी रिसिप्ट (एसआर) की रिडेम्पशन रेट में सुधार देखने को मिल सकता है। यह जानकारी एक नई रिपोर्ट में मंगलवार को दी गई।  

क्रिसिल की रिपोर्ट के मुताबिक, संचयी रिडेम्पशन रेट 600 आधार अंक बढ़कर 69-71 प्रतिशत के करीब पहुंच सकती है। 

इस सुधार की वजह पुराने खातों से रिकवरी और सुरक्षित एवं असुरक्षित एसेट क्लास में हाई सेटेलमेंट रेट्स का होना है। 

हाल ही में सेटेलमेंट गाइडलाइंस में हुए नियामक सुधार से तेज रिकवरी आने की उम्मीद है। 

रिपोर्ट में बताया गया कि करीब 19,000 करोड़ रुपये के मूल्य के खुदरा एसआर (स्ट्रेस्ड एसेट्स) पोर्टफोलियो के विश्लेषण से पता चलता है कि लो-विंटेज उधारकर्ताओं के बढ़ते अनुपात के कारण वसूली में सुधार हो रहा है। इसमें सुरक्षित और असुरक्षित दोनों प्रकार के स्ट्रेस्ड लोन शामिल हैं।

स्पेशल मेंशन अकाउंट्स (एसएमए) जैसे उधारकर्ताओं की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 24 में बढ़कर 25 प्रतिशत हो गई है, जो कि वित्त वर्ष 23 में 5 प्रतिशत थी। 

इन उधारकर्ताओं तक पहुंचना आसान है और पुराने उधारकर्ताओं की तुलना में वसूली के लिए कम प्रयास की आवश्यकता होती है।

रिपोर्ट के मुताबिक, एआरसी कई मामलों में पूरी बकाया राशि रिकवर करने में सफल हुए हैं। 

सुरक्षित लोन कैटेगरी, जिसमें होम लोन और प्रॉपर्टी के बदले लोन शामिल है, में मजबूत एसेट कवरेज रेश्यो देखने को मिला है। 

माइक्रोफाइनेंस को छोड़कर असुरक्षित लोन के लिए, उधारकर्ताओं में एक अच्छा क्रेडिट स्कोर बनाए रखने और नए लोन के लिए पात्र बने रहने की इच्छा ने सेटेलमेंट को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

जनवरी 2025 में आरबीआई ने एआरसी को बकाया राशि के निपटान के लिए अपनी बोर्ड-स्वीकृत नीतियां बनाने की अनुमति दी थी।

यह परिवर्तन एआरसी की स्वतंत्र सलाहकार समितियों (आईएसी) को केवल बड़े उधारकर्ताओं पर ध्यान केंद्रित करने की अनुमति देता है।

छोटे लोन यानी 1 करोड़ रुपये से कम राशि के लोन, अब आईएसी ढांचे के बाहर चुकाए जा सकते हैं, जिससे एआरसी के परिचालन संबंधी बोझ में काफी कमी आएगी।
 

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